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खुशियों का गुब्बारा

मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है. जीवन में आगे बढ़ने के लिए हमें बहुत कुछ सीखना पड़ता है और कई समझौते भी करने पड़ते हैं. अचानक हमें महसूस होता है कि कुछ लोग हमारी जिंदगी में उत्पात मचा रहे हैं. फिर भी हमें अपने क्रोध पर नियंत्रण रखना पड़ता है. यही तो समझौता है. यह नियंत्रण न हो तो हम छोटी-छोटी और अनावश्यक बातों पर ही लड़ते-झगड़ते रह जायेंगे. जीवन का यह उद्देश्य नहीं है. जीवन का उद्देश्य तो लोगों के बीच खुशियाँ बाँटते हुए आगे बढ़ना है. हम अपने लिए बड़े लक्ष्य रखें और उन्हें हासिल करने के लिए जी-तोड़ मेहनत करें, यही जीवन है. मानव के रूप में जन्म लिया है तो अन्य प्राणियों से बेहतर प्रदर्शन करना ही होगा. समाज के समक्ष एक आदर्श प्रस्तुत करना और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक चुनौती छोड़कर जाना ही हमारा ध्येय होना चाहिए. यहाँ यह स्पष्ट करना जरूरी है कि विलासिता और ऐश्वर्य के भौतिक साधन जुटाकर ही हम आदर्श नहीं बन सकते. इतिहास साक्षी है कि बड़े-बड़े राजाओं-महाराजाओं और नगर सेठों की अपेक्षा उनलोगों को ज्यादा मान-सम्मान मिला जिन्होंने समाज की बेहतरी की चिंता की . आपका वैभव आपको क्षणिक प्रतिष्ठा दिला सकता है परन्…

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