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आरजू

इत्तेफ़ाक़न हुई मुलाक़ात में तुमने छेड़ा तो
हसरतें जग उठीं, सपने जवान हो गए
दिन बेशक लद चुके मेरी बलन्दियों के
तुमने आरजू की, हम मेहरबान हो गए.

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